स्वाइन फ्लू की विस्तृत जानकारी

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एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अभी तक लगभग 8423 स्वाइन फ्लू मामलों में से 600 लोगों से अधिक की मौत हो चुकी है। इस घातक महा बीमारी से बचने के लिए पहले जनाना होगा कि स्वाइन फ्लू होता क्या है ये कैसे होता है और इससे बचने के क्या क्या तरीके है।


स्वाइन फ्लू होता क्या है : इन्फ्लूएंजा विषाणुओं के संक्रमण के कारण स्वाइन फ्लू होता है। इन्फ्लूएंजा वायरस , वायरस H1N1 इन्फ्लूएंजा और अन्य कई इन्फ्लूएंजा संक्रमण स्वाइन फ्लू, सुअर फ्लू या सूअर इन्फ्लूएंजा के  कारण बनते है। सुअर इन्फ्लूएंजा विषाणु का दुनिया भर की सुअर जनसंख्या में पाया जाना आम बात है। सुअर से मानव में इन विषाणुओं का ट्रान्सफर आसान नही होता और सदा ये मानव फ्लू के रूप में विकसित नहीं होता  है। हालांकि, यह रक्त में कुछ एंटीबॉडी अवश्य पैदा कर देता है लेकिन फिर भी हम ये कह सकते है कि हमे इन्फ्लूएंजा जानवरों और पक्षियों से ही मिलता है।

स्वाइन फ्लू के कारण : स्वाइन फ्लू सर्दी के मौसम में अधिक होता है जाहिर है पक्षियों और सुअरों पाए जाने वाले शूकर इन्फ्लूएंजा H1N1 और कुछ अन्य इन्फ्लूएंजा वायरस मनुष्यों को संक्रमित करते हैं , अधिक समय से पोल्ट्री फार्म और सूअरों के संपर्क में रह रहे लोगो के अन्दर इन्फ्लूएंजा वायरस होने की संभावना बढ़ जाती है और अगर हम मांस का सेवन करते है तथा मांस को ठीक ढंग से पकाया नही जाता तो भी स्वाइन फ्लू के वायरस का खतरा अधिक हो जाता है। इन सब के साथ-साथ खासी वायु लार मल मौखिक मार्ग रक्त आधान संक्रमित सुइयों बच्चे को गर्भवती माँ यौन संपर्क ये प्रमुख कारण है जिनसे ये वायरस एक सक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में जाते है।


सूअरों में स्वाइन फ्लू के लक्षण : इन वायरस का पता सूअरों में छींकने और खांसी के साथ तेज बुखार आने पर ही चलता है इसके अलावा साँस लेने में दिक्कत भूख कम लगना या वजन का लगातार गिरना भी संक्रिमत सूअर के ही लक्षण है अगर सूअरों के बीच मृत्यु की दर कम है या वह अपेक्षाकृत विकास नही कर रहे है तो भी डॉक्टरी जाँच अवश्य कराए क्योकि ये सब परेशानियाँ सक्रमण की वजह से हो सकती है।


मनुष्यों में स्वाइन फ्लू के लक्षण: गले में खराश, खांसी, नाक का बहना, आँखों में जलन सिर दर्द ,कमजोरी और ठंड के साथ बुखार सामान्यतः मनुष्यों में स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण है इसके अलावा स्वाइन फ्लू के लक्षण आजकल रोगियों में दस्त और उल्टी की शिकायत होने पर दर्ज की गयी है।


स्वाइन फ्लू से उत्पन्न मौत के सामान्य कारणों में किडनी खराब, निमोनिया मस्तिष्क में अत्याधिक बुखार, सांस का तेज होना है इसके अलावा डिहाइड्रेशन,अत्यधिक उल्टी और दस्त का आना भी स्वाइन फ्लू में नाजुक परिस्थिति होती है।





बच्चों में स्वाइन फ्लू के लक्षण: बच्चो में बुखार का 104 डिग्री तक जाना ठंड लगना, सूखी खांसी और गले में खराश उपस्थित लक्षण स्वाइन फ्लू के कारण बन सकते है। पेट में दर्द होना ,खांसी बुखार आने से दो सप्ताह के समय के भीतर बच्चो में सामान्य कमजोरी आ जाती है जिससे सक्रमण बढ़ने का खतरा अधिक हो जाता है इसलिए बच्चो का इनमें से कोई भी लक्षण दिखता है तो बिना वक़्त गवाए डॉक्टर से सम्पर्क करें।

स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ जाता है :

  • लंबी अवधि से फेफड़ों, हृदय, गुर्दे रोग से पीड़ित लोगो में
  • मधुमेह
  • जिगर प्रत्यारोपण, गुर्दा प्रत्यारोपण
  • कम प्रतिरक्षा प्रणाली
  • गर्भावस्था
  • स्थमा के लिए ड्रग्स लेने वाले रोगियों
किसी भी बीमारी या इलाज के लिए दवाई ले रहे रोगी में स्वाइन फ्लू होने का खतरा बढ़ जाता है।

स्वाइन फ्लू की रोकथाम: सिर्फ सूअर का मांस से दूरी स्वाइन फ्लू के जोखिम कम नही कर सकता
सूअर या किसी अन्य जानवरों के साथ संपर्क करने से पहलें मास्क और दस्ताने जरुर पहनें।


इसके अलावा नीचे दिए उपायों का पालन कर हम स्वाइन फ्लू के खतरे को कम कर सकते है।

  • दरवाजा का हैंडल , टॉयलेट का नल या किसी भी सार्वजनकि वास्तु को छुने के बाद नाक पर कभी भी हाथ न लगाये।
  • खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह से धोना।
  • खाँसी या छींकने वाले व्यक्ति के साथ दूरी रखें।
  • हमेशा ट्रेन बस स्टैंड और अन्य भीड़ भरे स्थानों पर मुखौटा पहन कर रखें।
  • गंदे कपडें और टिश्यू पेपर आदि का निवारण सही से करें।
  • फल और सब्जियों को हमेशा अच्छी तरह से साफ़ करें।
  • इन्फ्लूएंजा के किसी भी लक्षण का शक होने पर डॉक्टर से सलाह लें।

इलाज : दो दिनों के भीतर एंटीवायरल दवा का सेवन स्वाइन फ्लू में काफी राहत और तेजी से सुधार ला सकता है इसके अलावा नैसोवेक का टीका और फ्लू वैक्सीन की मदद से हम इस घातक बीमारी से काफी हद तक बच सकते है। स्वाइन फ्लू होने पर पानी का अधिक इस्तेमाल करे ताकि डिहाइड्रेशन की शिकयात न हो। स्वाइन फ्लू के लक्षण का पता चलते खुद इलाज करने की लापरवाही करने की जगह तुरंत अस्पताल में भर्ती हो जाएँ।
 

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