अस्थमा शिकार बच्चो के हर माता पिता को पता होना चाहिए यें 6 बातें


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भारतीय बच्चों में अस्थमा रोग एक भयंकर बीमारी का रूप लेते जा रही है एक अनुमान के अनुसार भारत में हर 12 बच्चे के बाद 1 बच्चा अस्थमा से पीड़ित है। ऐसा नही है कि अस्थमा से सिर्फ भारतीय बच्चों के स्वास्थ्य का विषय है। अगर विकसीत देश अमरीका की बात की जायें तो लगभग 11 बच्चों के बाद एक बच्चा अस्थमा से पीड़ित है। अमरीका के अरिज़ोनेंस क्षेत्र में अस्थमा एक भयंकर रोग है। इस शहर में 750,000 से अधिक लोग अस्थमा से प्रभावित है यहाँ पर बच्चों के स्वस्थ और जीवन जीने की लिए मदद करने के प्रयास में नि: शुल्क कल्याण कार्यक्रम योजनाएं चलाई जा रही है।


अस्थमा के साथ सामान्य श्वास मुश्किल है इसलिए बच्चों और माता पिता को यहाँ कुछ महत्वपूर्ण सुझाव प्रदान कर रहे है जो अस्थमा के खिलाफ जंग में और बच्चे में अस्थमा लक्षण की पहचान में आपकी मदद करेगा।






अस्थमा के सामान्य लक्षण : लगातार खाँसी, घरघराहट, सांस की तकलीफ और साँस लेने के दौरान सीटी की ध्वनि की शिकायत अस्थमा के संकेत होते है। एक अनुमान के अनुसार 80 प्रतिशत अस्थमा रोगियों को अस्थमा एलर्जी से होता है।


एक्सपर्ट मानतें है इस प्रकार की "एलर्जी अस्थमा" का पता रक्त परीक्षण के बाद ही चल पाता है इसलिए माता-पिता बच्चों का रक्त परीक्षण समय रहते ही करा ले और फिर अस्थमा के लक्षणों से बच्चे को मुक्त रखने के लिए उसे एलर्जी पर्यावरण से दूर रखें। इसके अलावा एलर्जी दवा ले। माता-पिता बचाव रोकथाम की प्रक्रिया को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने के लिए बच्चो को मोटीवेट करें।





लम्बें समय के लिए अस्थमा पर नियंत्रण : कभी-कभी अस्थमा मरीजों के लिए खतरनाक हो सकता है पर ऐसा तब होता है जब मरीज रोकथाम उपायों के साथ लापरवाही कर जाते है। ज्यादातर मामलों में मरीज अस्थमा के लक्षण पर काबू पा लेते है।


लम्बें समय के लिए अस्थमा पर नियंत्रण पाने के लिए मरीज को नियंत्रक दवाओं के साथ-साथ उनके माता-पिता रिश्तेदारों की सकरात्मक सोच की भी बहुत जरूरत होती है। फिर चाहे मरीज का सामना हर दिन अस्थमा से हो रहा हो। बच्चे को ठंडी, गर्मी के फ्लू पकड़ने और वायुमार्ग में सूजन जैसी समस्या होने पर भी नियंत्रक दवाओं को समय पर दे और हिम्मत रखते हुए परेहज जारी रखें क्योकि माता-पिता को निराश देख बच्चा भी निराशा से घिर जाता है।





योजना : डॉक्टर की मदद से अस्थमा के निदान के लिए रोग में शामिल दवाओं और दैनिक उपचार की रूपरेखा एक योजनाबद्ध तरीके से करें और उस योजना को बच्चे के भाई बहन देखभाल करने वालों लोगो और रिश्तेदारों के साथ भी शेयर करें ताकि उस योजना को सही तरीके से लागू करने में मदद मिल सकें। इसके अलावा अस्थमा लक्षणों को भी इस योजना में शामिल करना चाहिए और उसकी रिपोर्ट समय-समय पर डॉक्टर तक पहचानी चाहिए। इन रिपोर्ट्स की मदद से डॉक्टर अस्थमा रोगी में जल्दी सुधार ला सकते है।





इनहेलर का सही प्रयोग : अक्सर दमा से पीड़ित बच्चे गलत तरीके से इनहेलर का उपयोग करते है। बस केवल सीधे मुंह में दवा का छिड़काव फेफड़ों तक एक पूरी खुराक नही पहुचाता है। फेफड़े के निचले हिस्से तक दवा पहुचाने के लिए जरूरी है इनहेलर का प्रयोग सही तरीके से किया जायें। इनहेलर के सही इस्तेमाल के लिए जरूरी है आप बच्चे के साथ खुद इनहेलर लेने की ट्रेनिंग ले और इनहेलर का सही इस्तेमाल बच्चों को सिखाएं।





गतिविधि : कुछ माता-पिता अस्थमा से ग्रस्त मरीज बच्चों को खेल से दूर भगाते हैं। अस्थमा मुद्दों की वजह से स्वास्थ में कुछ कमजोर हो सकते हैं पर उन्हें हतोत्साहित नहीं करना चाहिए। अस्थमा से ग्रस्त मरीजों के लिए बाहरी एलर्जी से लड़ाई करने में इनडोर खेल एक बेहतर विकल्प हो सकता है। व्यायाम का शौक रखने वाले व्यायाम करने से पहले 15 मिनट इनहेलर का प्रयोग कर हल्के व्यायाम कर सकते है।




मदद के लिए कॉल या सम्पर्क करें : अकसर माता-पिता अस्थमा के पहले दौरे के बाद चेकअप और उपचार में देरी करते है जिसके परिणाम स्वरुप अस्थमा को नियंत्रित करने में वक्त लगता है। चेहरा या होठों के पास की त्वचा पीली पड़ रही है बच्चा तेजी से साँस ले रहा है या त्वचा पसलियों के नीचे खींच रही है ऐसे लक्षण नजर आते है बिना देर किये डॉक्टर से सम्पर्क स्थापित करें। बच्चों को सक्रिय और स्वस्थ रखने के लिये बीच-बीच में कॉल कर डॉक्टरी सलाह लेंते रहे।


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