विश्व हृदय दिवस के मौके पर दिल के रोगों से जुड़े मिथकों का पर्दाफाश

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डब्ल्यूएचओ के अनुसार दुनिया भर में 17.3 करोड़ लोगों मृत्यु हृदय रोग के कारण होती है इसलिए यह स्वास्थ्य में अधिकतर मौत का नंबर एक कारण बना हुआ है। एक अन्य अनुमान की बात करें तो उसके अनुसार 2030 तक, लगभग 23,600,000 लोगों की सीवीडी से मरने की भविष्यवाणी की जा रही है। इतनी अधिक मौतों के कारण ही इस भयानक बीमारी से कुछ काल्पनिक मनगढ़ंत बातें अर्थ मिथक जुड़े गये है जो एक बार व्यक्ति के मन में बैठ जाएं तो वह बीमारी से कम खतरनाक नही है।



'विश्व हृदय दिवस' के मौके पर आज हम दिल से जुड़े रोगों के बार में फैले उन कल्पित गाथा उर्फ़ मिथकों का पर्दाफाश करेंगें।



हृदय रोग से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई






1.मिथक : अभी तो मै जवान हूँ दिल की समस्याओं के बारें में मुझे चिंता करने की कोई जरूरत नही।



सच्चाई : भारत में तेजी से हो रहा शहरीकरण और अस्वास्थ्यकर लाइफस्टाइल की आदत हृदय रोगों को जन्म देती है। मोटापे और टाइप 2 मधुमेह होने पर हृदय की समस्याओं में बढोतरी होती है जिसके कारण हृदय रोग के जोखिम में वृद्धि हो जाती है। बदलती और भागती जीवनशैली में हृदय रोगों को कम उम्र में होना अब आम बात है।






2.मिथक: उच्च रक्तचाप चेतावनी के साथ हृदय रोग आता है।



सच्चाई : अधिकतर विशेषज्ञ मानते है कि उच्च रक्तचाप एक साइलेंट किलर होता है और यह एक समस्या है लेकिन हृदय घात के लिए यह कोई संकेत नही है। उच्च रक्तचाप में प्रारंभिक उपचार बहुत महत्वपूर्ण है अगर इस पर लापरवाही की जाए तो यह दिल का दौरा, स्ट्रोक और अन्य कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर देता है।





3.मिथक: हार्ट अटैक होने से पहले सीने में दर्द होगा। 



सच्चाई : हार्ट अटैक में सीने में दर्द या बेचैनी होना आम बात है। दिल का दौरा पड़ने के समय इस सूक्ष्म लक्षण के अलावा सांस की तकलीफ मतली, बेचैनी, मन का चंचल होना और बाहों, जबड़े, गर्दन में दर्द होना भी हार्ट अटैक के संकेत है।





4.मिथक: हृदय रोग पारिवारिक है इसे रोका नही जा सकता है।



सच्चाई : परिवार के इतिहास में हृदय रोग होने से अन्य स्वस्थ लोगो पर दिल से जुड़े रोगों का खतरा अधिक होता है लेकिन बेहतर खाने और एक बेहतर जीवन शैली अपनाकर अपने दिल को स्वस्थ रखा जा सकता है और हृदय रोग के जोखिम को भी कम किया जा सकता है। जिनके परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी दिल के रोगों से जुडी समस्याओं का सामना रही हो उनमे दिल स्वास्थ्य को लेकर निष्क्रियता दिखाने पर हृदय रोग सक्रिय हो जाने का खतरा अक्सर बना रहता है।





5.मिथक: जब 35 वर्ष के होंगे तब कोलेस्ट्रॉल का चेकअप करा लेंगे।



सच्चाई: अगर आपके परिवार के इतिहास में हृदय रोग शामिल है तो हम सिफारिश करते है कि आपको कोलेस्ट्रॉल की जाँच 20 वर्ष के आयु में करा लेनी चाहिए और इससे जब आपकी उम्र बढेगी तो आप में हृदय रोग के विकास की संभावना कम हो जायेगी।





6.मिथक: पैरों में दर्द का दिल के साथ कुछ लेना देना नही है।



सच्चाई : पैर में दर्द परिधीय धमनी की बीमारी का संकेत हो सकती है। पैड के कारण धमनियों में अवरुद्ध पैदा होते है इसी कारण पट्टिका बन जाती है जिसकी वजह से मांसपेशियों में दर्द महूसस किया जाता है। परिधीय धमनी के साथ जीने वाले लोगो में दिल का दौरा या स्ट्रोक का खतरा समान्य लोगो से 5 गुना ज्यादा होता है।





7.मिथक: मेरा दिल तेजी से धड़क रहा है क्या मुझे हार्ट अटैक पडा है।



सच्चाई : अधिकतर दिल की धडकन बदलने पर हमें घबराने की जरूरत नही होती है लेकिन कई बार असामान्य या अनियमित दिल की धड़कन अतालता की निशानी होती है। वैसे तो अधिकांश अतालता हानिरहित है लेकिन बार-बार ऐसे होने पर इसके प्रभाव को कम नही समझा जा सकता इसलिए उपचार की आवश्यकता को अधिक देर तक टाला नही जा सकता है।

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